दुर्ग केंद्रीय जेल से छत्तीसगढ़ में खुले जेल की शुरुआत, चयनित बंदियों को मिलेगा रोजगार का अवसर
दुर्ग। छत्तीसगढ़ में जेल सुधार की दिशा में एक नई व्यवस्था की शुरुआत की गई है। प्रदेश में पहली बार खुले जेल (Open Prison) की व्यवस्था दुर्ग केंद्रीय जेल से शुरू की गई है। इसके तहत पात्र बंदियों को धीरे-धीरे जेल की चारदीवारी से बाहर नियंत्रित वातावरण में जाकर रोजगार से जुड़ने का अवसर दिया जाएगा।
सरकार ने इस संबंध में 21 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद 22 सितंबर को जेल विभाग के डीजी हिमांशु गुप्ता ने दुर्ग केंद्रीय जेल में इस व्यवस्था का शुभारंभ किया।
किन बंदियों को मिलेगा खुले जेल का लाभ?
खुले जेल के लिए पात्रता के संबंध में कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं। प्रारंभिक तौर पर अधिकतम 50 बंदियों को इस व्यवस्था में शामिल किया जाएगा।
इसके लिए ऐसे बंदियों को प्राथमिकता दी गई है जिनकी सजा 10 वर्ष से अधिक है और जिनकी उम्र 30 से 60 वर्ष के बीच है। संबंधित बंदी शारीरिक रूप से काम करने में सक्षम होना चाहिए।
इसके अलावा जेल में बंदियों के आचरण को भी चयन का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। ऐसे बंदियों को शामिल किया जा रहा है जिनका जेल में व्यवहार अच्छा रहा हो और जो कम से कम दो बार पैरोल पर जाकर निर्धारित समय पर वापस जेल लौट चुके हों।
महिलाओं और आबकारी मामलों के बंदी अलग
खुले जेल की व्यवस्था में महिलाओं और आबकारी अधिनियम से जुड़े बंदियों को अलग रखा गया है। जेल प्रशासन ने पात्रता के निर्धारित मानकों के आधार पर बंदियों की सूची तैयार की है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में अवसर देना है, जिन्होंने जेल में रहते हुए अनुशासन और अच्छे आचरण का प्रदर्शन किया है।
पहले जेल परिसर में काम, फिर बाहर जाने का अवसर
शुरुआत में चयनित बंदियों को सीधे जेल से बाहर काम करने के लिए नहीं भेजा जाएगा। ट्रायल के तौर पर उन्हें पहले जेल परिसर के भीतर ही अलग-अलग कार्यों में लगाया जाएगा।
इनमें आस्था नाश्ता कैंटीन, गौशाला और अन्य निर्धारित कार्य शामिल हैं। इस चरण के अनुभव और व्यवस्था की समीक्षा के बाद पात्र बंदियों को खुले वातावरण में जेल परिसर के बाहर काम करने की अनुमति दी जाएगी।
बाहर जाने वाले बंदियों के लिए आने-जाने का समय भी निर्धारित रहेगा। उन्हें शाम 6 बजे से पहले जेल वापस लौटना अनिवार्य होगा।
दुर्ग केंद्रीय जेल में क्षमता से अधिक बंदी
दुर्ग केंद्रीय जेल में वर्तमान में करीब 2,439 बंदी निरुद्ध बताए गए हैं, जबकि जेल की क्षमता करीब 2,200 बंदियों की है। इनमें 1,100 से अधिक सजायाफ्ता बंदी हैं। जेल में नक्सली मामलों से जुड़े बंदी भी निरुद्ध हैं।
खुले जेल की व्यवस्था को जेल सुधार और पुनर्वास की दिशा में एक प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य पात्र बंदियों को काम का अनुभव देने और धीरे-धीरे उन्हें सामाजिक जीवन से जोड़ने का अवसर उपलब्ध कराना है।
दुर्ग केंद्रीय जेल में इसके परिणामों की समीक्षा के बाद यदि व्यवस्था प्रभावी रहती है, तो इसे प्रदेश की अन्य जेलों में भी लागू किए जाने की संभावना है।











